मजेदार दादी की कहानियां।

मजेदार दादी की कहानियां।

दोस्तों अगर आप भी एक संयुक्त परिवार में रहते हैं तो आपने भी अपने दादी या फिर दादाजी से अवश्य ही कहानियां सुनी होगी अगर आप और अधिक कहानियां सुनना चाहते हो तो आप हमारे इस आर्टिकल में मजेदार सबसे प्रमुख एवं फेमस दादी की कहानियां इस लेख में आप जानोगे।


दादी की कहानियां
दादी की कहानियां|


दोस्तों दादी की कहानियां किसे अच्छी नहीं लगती जब हम भी बच्चे थे तो हम भी हमेशा रात को सोते वक्त अपनी दादी से कहानियां सुनते थे, और बहुत सारी ज्ञान वाली बातें सुनते थे मगर आज के इस आधुनिक दौर में वह बातें कहां रह गई है अब लोग अपना टाइम स्मार्टफोन पर बिताते हैं इसीलिए हम भी आपके लिए आपके स्मार्टफोन में दादी की कहानियां लेकर आया हूं।


अगर आपकी दादी आपको कहानियां नहीं सुनाती है तो आप हमारे इस लेख को पढ़ें और दादी की कहानियां सुनने जैसा feel करें। और वैसे भी दादी बच्चों को कहानियां उसे बुद्धि प्रदान करने के लिए ही देती है और हमारी कहानियां भी आपको बहुत अधिक बुद्धि प्रदान करेगी इसलिए आप हमारे द्वारा दिए गए  मजेदार दादी की कहानियां को अवश्य पढ़ें।




दादा और दादी की कहानियां हिंदी में।



दोस्तों बचपन में तो हमने और बहुत कोई लोगों ने अपने दादा या दादी के द्वारा बहुत सारी अच्छी-अच्छी कहानियां सुनी होंगी के इस युग में शायद ही कोई ऐसे दादा,दादी है जो अपने पोते पोतियो को कहानी सुनाते हैं अगर आप भी अपने पोते पोतियो कहानी सुनाना चाहते हैं और एक अच्छे कहानी ढूंढ रहे हैं तो यह आपके लिए ही है मैं आपको नीचे बहुत ही बेहतरीन कहानियां लेकर आया हूं।

दादी की कहानियां नंबर 1."चालाक बुढ़िया दादी दादी की कहानी"



दोस्तों बहुत समय पहले की बात है एक गांव था जहां पर एक बहुत ही अच्छी बूढ़ी दादी रहा करती थी वह बूढ़ी दादी घर में अकेले रहती थी जो कि उसके एक पुत्री थी जिसका विवाह हो गया था और विवाह हो जाने के बाद वह अपने ससुराल में रहने लगी और बुढ़िया अपने घर में अकेले ही रहती थी उसके साथ उसका एक पालतू कुत्ता भी रहता था।


बूढ़ीया अपने पालतू कुत्ते के साथ एक झोपड़ी में रहा करती थी और सुख चैन के साथ अपना समय बिता रही थी तभी उसे अपनी बेटी का याद आया तो उसने सोचा चलो अपनी बेटी से उसके ससुराल में जाकर मिलाती हो यह सब सोच विचार करके उस बुढ़िया ने अपनी बेटी से मिलने के लिए तैयारी होने लगी।


बूढ़ीया अपनी बेटी से मिलने के लिए तैयार होकर घर से निकले तब उसने अपने पालतू कुत्ते से कहा कि तुम इस घर की रखवाली करना मैं अपनी बेटी के यहां जा रही हूं और मैं 1 महीने के बाद वापस आ जाऊंगी तब तक घर का देखभाल एवं सुरक्षा तुम्हें ही करना है यह अपने कुत्ते से बोलकर बूढ़ीया वहां से निकल पड़े।


बूढ़ीया के बेटी के घर जाने के लिए उसे एक घने जंगल से होते हुए गुजर रहा था बूढ़ीया बहुत ही निडर थी वह आसानी से जंगल की तरफ बढ़ती गई जैसे वह आगे बढ़ी उसे जंगल में एक भालू से सामना हो गया।


बुढ़िया दादी भालू को देखकर बिल्कुल भी नहीं डरी और उसके सामने चली गई।


भालू ने बुढ़िया से कहा-हां हां बड़े दिनों के बाद आज एक इंसान का मांस खाने को मिलेगा आज दो दावत हो जाएगी।

उस चालाक बुढ़िया ने भालू से कहा-अरे भालू भैया अभी तो मैं बहुत पतली हूं हड्डी है मेरे शरीर में मैं अपने बेटी के यहां जा रही हूं और वहां जाकर भी रोटी खाऊंगी और मोटी हो जाऊंगी फिर तुम मुझे खा लेना अभी तो मेरे शरीर में हड्डिया ही बची हुई है और अगर तुम मुझे खा लोगे तो तुम्हारा पेट भी नहीं भरेगा।


यह बात सुनकर भालू ने बुढ़िया से कहा अच्छा ठीक है जा बेटी घर और घी रोटी खाना शरीर मोटा ना फिर वापस आना फिर मैं तुझको खाऊंगा बुढ़िया ने भी कहा अच्छा ठीक है।


इस प्रकार से गुड़िया उस भालू से बच गए और आगे की ओर चलती गई, तभी रास्ते में उसे एक बाकी दिख गया बुढ़िया ने भी बाघ को वही बात बताएं और बात भी मान गया का ठीक है तू जा बेटी घर और घी रोटी खाना शरीर मोटा ना फिर वापस आना हम तुमको खाएंगे।


गुड़िया किसी तरह अपनी बेटी के घर चली गई बेटी के घर जाकर बुढ़िया ने मजे से 15 दिन बिताए उसके बाद उसने अपनी बेटी को कहा बेटी अब मैं अपने घर जाना चाहती हूं बेटी ने कहा ठीक है तब बुढ़िया ने सोचा कि अब तो वह जाएगी तो उसे तो जानवर मार देंगे उसने अपनी बेटी को वह सब हाल बता दिया तब उसकी बेटी ने कहा कि ठीक है मैं कुछ तरकीब लगाती हूं।


फिर बुढ़िया ने अपनी बेटी से कहा कि तू एक बड़े से कोहरे को ले आ और उसमें से उसके अंदर के सारे सामान को एक छेद के द्वारा निकाल दें और उसे धूप में अच्छे से सुखा दे।


बुढ़िया ने जो भी कहा उसकी बेटी ने फटाफट वह किया उसके बाद बढ़िया उस कोहरे के अंदर चली गई और आराम से अपने घर की ओर निकल गई।


जैसे ही वह वापस आ रही थी तभी वहीं से उसके पास आ गया शेर को लगा कि आखिरकार यह कौन सा ऐसा कोहरा है जो चलता भी है वह बहुत आश्चर्यचकित था तभी उसे लगा कि हो सकता है कहीं यह बुढ़िया तो नहीं तो उसने कोहरे से पूछा।


शेर ने कोहरे से पूछा-कौन है तू कहां से आई है कहीं तो वह बुढ़िया तो नहीं।


तो उस चालाक बुढ़िया ने कहा-मैं ना जानू बुढ़िया बुढ़िया मैं तो हुए कोहारा चल मेरे कोहरा टक टक टक।


और वह बुढ़िया वहां से निकल गए शेर को लगा कि शायद या कोई कोहरा ही है जो कि  चलता है,जैसे ही बढ़िया और आगे बढ़ी तो उसे वह भालू मिल गया भालू के साथ भी उसने वही बर्ताव किया इस प्रकार बुढ़िया अपने चला कि से दोबारा जंगली जानवरों से सुरक्षित निकल गए और अपने घर को पहुंच गए।


दादी की कहानियां नंबर 2."पेटू सौरव दास दास की कहानी"



बहुत समय पहले की बात है एक गांव था जहां पर एक बहुत ही पेटू व्यक्ति रहा करता था बहुत ही अधिक खाना खा करता था वह जितना कमाता था उससे भी अधिक उसे भोजन की आवश्यकता होती थी क्योंकि वह बहुत अधिक आ रहा था और उसकी पेट जल्दी नहीं भर्ती थी।


उसके गांव में एक भोजन खाने की प्रतियोगिता हुआ करता था और वह उस प्रतियोगिता में हर वर्ष हर साल जीता के जीता ही था क्योंकि उसके इतना उसके गांव किया उसके आसपास के जितने भी गांव है कोई भी व्यक्ति नहीं खाता था।


वाह इतना भुक्खड़ था जी वह जिस होटल में जाता था उस होटल का पूरा खाना खा जाता था लोग उसे अभिनय दावत में भी बुलाने से डरते थे क्योंकि वह अकेले 20 25 लोगों का खाना खा चुका था।


उसी गांव के पास वाले गांव में एक बहुत ही लालची और चालाक हलवाई रहता था वह अपने दुकान पर हमेशा लड्डू खाने की प्रतियोगिता रखता और हारने वाले से ₹5000 जुर्माना लेता था।


वह गलत तरीके से इस प्रतियोगिता में जीता था जब भी कोई व्यक्ति इस प्रतियोगिता में जीतने की कगार पर पहुंचता तो वह अपने खाने की क्वांटिटी को बहा देता था कि वह व्यक्ति उस खाने को ना खा पाए और प्रतियोगिता हार जाए।


तभी एक दिन वह टैटू सौरभ दास उसी गांव में गया था उसने वह सब सुना उसके तो खुशी के ठिकाने ना रहे वह दौड़ता हुआ उस होटल पर पहुंच गया और वहां का चलो हमारे साथ प्रतियोगिता लगाओ उस दुकानदार ने उस से 50 लड्डू खाने की प्रतियोगिता लगाए अगर वह 50 लड्डू खा जाता तो उसे ₹5000 देते और वह प्रतियोगिता हारेगा तो उसे ₹5000 देने पड़ेंगे।


यह सुनकर रामदास  का खुशी का ठिकाना ना रहाफटाक से होटल के टेबल पर बैठ गया और बोला जल्दी से प्रतियोगिता स्टार्ट करो और उस लालची दुकानदार ने फटाक से 50 लड्डू लेकर आए तभी फटाफट से सौरव दास ने सारे लड्डू को खा गया तो उस लालची व्यक्ति ने कहा अरे अरे मैंने तो इसमें 40 ही लड्डू दिए थे अभी तो तुम्हें 10 लड्डू और खाना है।


रामदास मुस्कुराते हुए बोला चलिए अच्छा है अभी तो मेरी आधी पेट भी नहीं भरी थी आप हमारे लिए 10 लड्डू और लेकर आ जाओ और हो तो और एक्स्ट्रा पिला देना जब मैं प्रतियोगिता जीत लूंगा तो उसके पैसे दे दूंगा।


उस लालची व्यक्ति ने अपने लड्डू को जोड़ जोड़ कर बड़े-बड़े 10 लड्डू बनाए ताकि वह सौरव दास कुंदस लड्डू को न खा पाए और प्रतियोगिता हार जाए संतु रामदास ने उस 10 और लड्डू को फटाफट सिखाया बोला 50 लड्डू हुए कि नहीं की और खाने हैं तो और है बचा हुआ तो लेकर आओ यह सब देखकर उस लालची व्यक्ति को लग गया किया बहुत बड़ा भुक्कड़ है या उसके होटल की सारी खाना को खा जाएगा छोड़ो हम यह शर्त हार जाते हैं।


इस प्रकार से सौरव दास ने उस लालची दुकानदार को सबक सिखाया और प्रतियोगिता भी जीती और ₹5000 भी जीत गए लिए।


निष्कर्ष-


आज के इस लेख में आपने जाना-
•मजेदार दादी की कहानियां।
•दादा और दादी की कहानियां हिंदी में।
•दादी की कहानियां नंबर 1.
"चालाक बुढ़िया दादी दादी की कहानी"
•दादी की कहानियां नंबर 2.
"पेटू सौरव दास दास की कहानी"


दोस्तों मुझे बुरा सा है कि आपको हमारे द्वारा बताए गए दादी की कहानियां पसंद आई होगी तो आप हमारे इस लेख को अवश्य ही अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।


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