5 मजेदार भूतों की कहानियां हिंदी में।

5 मजेदार भूतों की कहानियां हिंदी में।

दोस्तों अगर आपको भी भूतों की कहानियां बहुत पसंद है और आप नए-नए भूतों की कहानियां जानना चाहते हैं सुनना चाहते हैं तो बिल्कुल सही जगह पर आए हैं क्योंकि मैं आपके लिए हमेशा नए-नए भूतों की कहानियां लेकर आता हूं आज के इस लेख में मैं आपको पांच सबसे डरावने और मजेदार भूतों की कहानियां लेकर आया हूं जिसे सुनने के बाद आपको मजा आ जाएगा।

भूतों की कहानियां
भूतों की कहानियां।

मैं आपको ऐसे ऐसी कहानियां सुनाऊंगा जिसे सुनकर आप अचंभित हो जाएंगे और ऐसे भूतों की कहानियां सुनाऊंगा जो कि आज तक आपने कभी सुने भी नहीं होंगे।

वैसे तो पहले के जमाने में हमारी दादी या नानी हमें कहानियां सुनाई करती थी और जिनमें से सबसे रोमांचित कहानी भूतों की कहानियां हुआ करती थी मगर आज के इस युग में कोई भी नहीं अपने पोते पोती को कहानियां सुनाते हैं।

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इसलिए आज हमने आपके लिए सबसे बेहतरीन भूतों की कहानियां लेकर आया हूं और इतना मजेदार कहानियां लेकर आया हूं जिसे पढ़कर आपको बिल्कुल मजा आ जाएगा अगर आपको ऐसी कहानियां सुनकर मजा ना आए तो हमें कमेंट करके बता देना तो चलिए अब पांच सबसे अच्छे और एकदम नए भूतों की कहानियां सुनते हैं।


भूतों की कहानियां, मजेदार-डरावने भूत की कहानी।


दोस्तों मैं आपको नंबर करके भूतों की कहानियां सुनाऊंगा अभी मैं आपको भूतों की कहानी का सबसे पहला और सबसे मजेदार वाला कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप बहुत ही रोमांचित फील करेंगे और मुझे पूरा आशा है कि आप को यह भूत की कहानी बहुत ही पसंद आएगी और आपने शायद ही ऐसी कहानी कभी भी सुनी होगी अपने जीवन में।

 बिना टाइम को बर्बाद किए हुए भूतों का कहानी को पढ़ते हैं।

भूतों की कहानी नंबर 1."भूखी प्यासी खून पीने वाली भूतनी"


बहुत समय पहले की बात है एक गांव था जिसका नाम जबलपुर था वहां के लोग बहुत ही अच्छे थे वहां पर सभी धर्मों के लोग रहते थे मिलजुल कर रहते थे वहां के लोग हमेशा दान पूर्ण किया करते थे परंतु वहां पर एक बहुत ही धनवान व्यक्ति रहा करता था जो की बहुत ही क्रूर था और वह बहुत ही ताकतवर था वह एक तरह से वहां का गुंडा ही था।

वह उस गांव पर अपना हुकुम चलाना चाहता था और चलाता भी था वह वहां के लोगों को डरा के रखा था अगर वह उस गांव के किसी भी लोग को कोई कार्य न करने के लिए कह दे तो किसी की हिम्मत नहीं होती थी उसके खिलाफ जाने की क्योंकि वह बहुत धनवान और गुंडे टाइप का व्यक्ति था जो कि किसी को भी डरा धमका कर कुछ भी करा देता था।

धीरे-धीरे वह व्यक्ति और ही क्रूर होता चला गया उसका नाम सेठ रामानंद सिंघानिया था वह अब लोग वहां के लोगों को बहुत परेशान करने लगा और जबरन उनसे उनकी धन संपत्ति को छीनने लगा तभी वहां पर एक " रामावती" नाम की लड़की ने इसका खुलकर विरोध किया और उसने उस व्यक्ति के ऊपर पुलिस में कंप्लेंट करवा दिया।

जब उस व्यक्ति को पता चला अर्थात सेट को कि किसी रामावती नाम की लड़की ने उसके ऊपर केस किया है तो उसने उस लड़की को बहुत धमकाया और उसने कहा उससे कि तुम यह केस वापस ले लो पर वह नहीं मानी पेट को पुलिस ने पकड़ लिया पर सेट पैसों के बदौलत जेल से निकल गया और उसने पूरा प्लान बना लिया कि वह उस लड़की को बर्बाद कर देगा।

सेठ ने पहले तो लड़की की सारी शर्तों को मान गया कि वह वहां के लोगों को नहीं सताएगा और लड़की से दोस्ती कर ली उसके बाद सेठ ने फटाक से उसकी ब्याह करवा दिया परंतु सेठ ने उसे अपने ही एक गुंडे से विवाह करवा दिया था ताकि वह गुंडा उस लड़की की का जीवन बर्बाद कर सकें।

और बिल्कुल वैसा ही हुआ उस गुंडे ने सेट के कहने पर लड़की को हमेशा प्रताड़ित करता था मारता पीटता ऐसे करते-करते उस गुंडे ने उसे खाना पीना देना बंद कर दियालगभग 1 महीने तक वह बिना खाना पानी के जीवित रहे उसके बाद उसकी मृत्यु हो गई अकाल मृत्यु होने के कारण और बहुत ही कष्ट से मृत्यु होने के कारण उसकी आत्मा की शांति नहीं हो सकी और उसकी आत्मा भटकने लगी। तभी अचानक से रामावती की भूतनी अपने पर हुए जुल्म का बदला लेने के लिए सेट पर हमला कर दिया और उसे मार डाला।

अर्थात रामावती के भूत ने सेठ को मार डाला अब वह भूतनी हमेशा लालची एवं घमंडी लोगों की तलाश करती रहती है और उसे जो भी इस प्रकार के व्यक्ति मिल जाते हैं उसे उसी समय मार डालती है, और उसके शरीर का सारा खून पी जाती है। अब उस इलाके में शांति तो है मगर अब भूतनी का पूरा खौफ भी है परंतु डरने की बात इसलिए नहीं है क्योंकि वह अच्छे व्यक्तियों को नहीं मारती है वह सिर्फ लालची और घमंडी लोगों को और दूसरों पर अत्याचार करने वाले लोगों को ही मृत्यु प्रदान करती है।

इस कहानी से हमें सीख मिले-हमें किसी का बुराई नहीं करना चाहिए हमें किसी को कष्ट देना नहीं चाहिए वरना उसका फल बहुत ही बुरा होगा अगर हम अच्छे कार्य करेंगे तो हमें किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है।

भूत की कहानी नंबर 2."गुस्सैल भूत की कहानी"


दोस्तों एक गांव था जिसका नाम रामचंद्रपुर था वहां के लोग बहुत ही अधिक गुस्सैल टाइप किए थे और वहां के लोग बहुत ही बदतमीज और बे अदब टाइप किए थे वह हमेशा आपस में ही लड़ते रहते थे अरे अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते थे।

उस गांव में कोई और दूसरे गांव का व्यक्ति बिल्कुल भी नहीं जाना चाहता था यहां तक कि उस गांव में कोई विवाह भी नहीं करता था क्योंकि वहां के लोगों का स्वभाव भी बहुत ही खराब था वहां पर कुछ व्यक्ति बहुत अच्छे थे परंतु ज्यादातर व्यक्ति वहां के लालची घमंडी और दूसरों की चीजों को छीनने वाले टाइप के थे वह लोग हमेशा दूसरों की बुराई करना दूसरों से लड़ना अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान कर देना इस टाइप के कारण करते ही रहते थे।

उन लोगों की ऐसी बर्ताव के कारण वहां के आस-पास के गांव भी उनसे बहुत खफा रहते थे क्योंकि वह पूरे इलाके को बदनाम कर रखा था जिससे कि उनके आसपास के गांव वालों का भी व्यापार में बहुत ही अधिक प्रभाव पड़ रहा था क्योंकि कोई भी व्यापारी उस गांव में जाना ही नहीं चाहता था तभी उस गांव में एक बहुत ही खतरनाक घटना घट जाती है।

वहां के लोगों में आपसी मतभेद के कारण एक भीषण जंग छिड़ जाता है जिसमें वह खुद को ही मारने काटने लगते हैं उस लड़ाई में लगभग लगभग गांव के 80% आबादी उस लड़ाई के भेंट चढ़ जाते हैं और सारे मारे जाते हैं बचा 20% आबादी जहां तहां भाग्य चले जाते हैं और वह गांव पूरा ही खंडार बन जाता है।

उस गांव को खंडहर देखते हुए अब बहुत सारे व्यापारियों ने सोचा कि क्यों ना उसको हम अपना बना ले और उसमें अपना व्यापार को बढ़ा लें क्योंकि वहां तो अब कोई है ही नहीं कोई बदमाश व्यक्ति भी नहीं है और उन्हें वहां से व्यापार करना भी आसान हो जाएगा और फ्री में इतने सारे जमीन मिल जाएंगे जिसके चलते व्हेल सारे व्यापारी विचार किया परंतु उसमें से एक व्यापारी ने सोचा क्यों ना मैं बहुत ही पहले जाकर सारे जमीन को अपना कर लूं और उसने वही किया।

लेकिन घटना तब घटी जब वह व्यक्ति उस गांव में घुसा और घुसने के कुछ ही देर बाद उस व्यक्ति की लाश बहुत ही दयनीय अवस्था में मिले जबकि उस गांव में कोई भी नहीं था अर्थात उस गांव में बहुत ही गुस्सेल भूत का वास हो गया क्योंकि वहां के लोग गुस्सैल थे और अकाल मृत्यु के कारण उनकी आत्मा भटकने लगे और आज भी हुए लोग आपस में लड़ते हैं और वहां पर जाने वाले किसी भी व्यक्ति को भी मार डालते हैं।

उस व्यापारी की दर्दनाक मृत्यु के बाद कुछ और लोगों को लगा कि यह शायद ड्यूटी घटना है और कुछ और लोगों ने भी वहां पर जाकर देखा है और वह भी वापस नहीं आए और उनकी भी मृत्यु बहुत ही दर्दनाक तरीके से हुई थी ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अपने गुस्से को निकालने के लिए उन्हें बहुत ही बेरहमी से पीटा है और पीट-पीटकर उन्हें मार डाला है और वह सभी काम है वहां की गुस्सैल बूते कर रही थी।

अभी भी उस गांव में कोई भी व्यक्ति नहीं जाता है और वहां के आस-पास के गांव में भी इन गुस्सैल भूतों का पूरा खौफ बना हुआ है लोग उस गांव में ना जाते हैं और ना किसी को जाने के लिए कहते हैं।

भूतों की कहानी नंबर 3"शादी करने वाली भूतनी की कहानी"


दोस्तों आज से करीब 10 वर्ष पहले बिहार के एक संबलपुर नामक गांव में एक बहुत ही अद्भुत घटना घटी थी वहां पर एक श्मशान का इलाका था जो कि वहां का सबसे बड़ा शमशान था परंतु वहां पर घटना घटी थी वहां पर रात को प्रत्येक रात को लगभग 12:00 बजे के करीब एक भूतनी शादी के जोड़े में वरमाला लिए हुए खड़े रहती है और वहां से किसी भी गुजरने वाले व्यक्ति को शादी करने के लिए कहती है।

और जो व्यक्ति उसकी बात नहीं मानता है उसे उसी वक्त मार डालती है और जो व्यक्ति उसकी बात को मान जाता है वह गायब हो जाता था और कुछ व्यक्ति अपनी आसमान शक्ति को भूलकर पागल बन जाते थे और वह उस भूतनी का नाम जपते रहते थे और अचानक से हंसने लगते थे और कभी रोने लगते थे वैसे यह कोई जरूरी नहीं था कि सभी को वह भूतनी उस जगह पर मिल जाए वह किसी किसी को भी भेंट होती थी और जिस से भी भेंट होती थी उनमें से आज तक कोई भी नहीं बचा शिवाय कुछ व्यक्तियों के क्योंकि उन लोगों ने उस भूतनी को दूर से ही देख कर चले आए थे।

और कहा जाता है कि आज भी वह भूतनी उसी प्रकार से वही कार्य कर रही है अब लोग रात के 12:00 बजे के बाद उस इलाके में जाते ही नहीं है परंतु कभी-कभी वह भूतनी उस इलाके से निकलकर किसी और इलाके में भी चली जाती हैं तभी वहां के लोगों ने सोचा कि आखिरकार वह भूतनी है कॉल और उन्होंने बहुत ही सिद्ध तांत्रिक एवं डॉक्टर्स की टीम को बुलाया।

उन लोगों ने अपने साधना शक्ति एवं डॉक्टरों की टीम ने कुछ पागल हो जो कि भूतनी के द्वारा पागल बनाए गए थे उन्हें उस साधना में बिठाया और उन्हें सम्मोहन के द्वारा सम्मोहित कर लिया और उससे पूछा कि आखिरकार तुम्हारे साथ हुआ क्या था।

सम्मोहन के वश में आने के बाद उन पागलों ने सारी कहानियां बताएं कि किस प्रकार वह भूतनी ने उसके साथ शादी रचाई और उसे एक ब्रेन का जादुई प्रयोग से उसे बेहोश कर दिया और अब उसे कुछ भी याद नहीं है कि उसके साथ क्या हुआ था सिवाय इसके कि उसने उस भूतनी के साथ शादी किया है तभी तांत्रिकों ने उस भूतनी को बुलाने के लिए अपनी साधना में उस पागलों की सहायता ली और उस भूतनी को उस पागल के शरीर में बुलाया।

जब भूतनी ने उस पागल के शरीर में प्रवेश किया तब तांत्रिक ने और डॉक्टर्स की टीम ने उनसे पूछा कि आखिरकार उसने वैसा उन लोगों के साथ क्यों कर रही है तभी उस भूतनी ने अपनी जीवन की कहानी बताएं और उसने पढ़ लिया है कि अब वह दूसरे व्यक्तियों के जीवन बर्बाद करेगा जिस प्रकार उसके जीवन को बर्बाद किया गया है।

उस भूतनी ने बताया कि वह एक बहुत ही गरीब परिवार की लड़की थी और उसका विवाह कहीं भी तय नहीं हो रहा था और एक बार तो उसका भी वह भी हो गई थी और शादी के मंडप में उसे लड़के ने छोड़ कर चला गया था परंतु उसने फिर भी हार नहीं मानी थी उसके बावजूद उसके साथ या घटना दोबारा हो गए जिस से आहत होकर उसके माता-पिता ने आत्महत्या कर लिया और माता-पिता के खोने के गम में उसने भी आत्महत्या कर लिया जिसकी वजह से उसकी आत्मा को शांति नहीं मिल सकी और उसने परम लिया कि जिस प्रकार समाज के लोगों ने उसकी शादी के लिए उसका जीवन बर्बाद किया है उसी प्रकार अब वह शादी करके ही समाज के लोगों की जीवन को बर्बाद करेगी।

तभी उन लोगों ने उस भूतनी को समझाया कि तुम ऐसा क्यों कर रही हो तुम्हारे साथ जिन लोगों ने बुरा किया तुम उनके साथ बुरा करो परंतु जिन लोगों ने तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा उनके साथ तुम क्यों ऐसा कर रही हो उस लड़की ने कहा कि मैंने भी तो उन लोगों का कुछ नहीं बिगाड़ रहा था पर उन्होंने मेरा सब कुछ बिगाड़ दिया अब मैं किसी को भी नहीं छोडूंगी तभी उस तांत्रिक ने कहा कि तुम गलत कर रही हो मैं अपनी सिद्धियों से तुम्हें नष्ट कर दूंगा वरना तुम ऐसे कृत्य छोड़ दो।

उस भूतनी ने कहा तुम्हें जो करना है कर लो मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगी और मैं सबको मार डालूंगी तब उस तांत्रिक ने अपनी सिद्धि के प्रयोग से उसे नष्ट करना चाहा परंतु वह कर नहीं सका क्योंकि भूतनी की शक्ति उस तांत्रिक की शक्तियों से भी अधिक थे तब उसने अपनी सिद्धियों के द्वारा उसे उसी श्मशान में बंद कर दिया।

परंतु अभी वह भूतनी उस शमशान के इलाके में ही भटकती रहती हैं तांत्रिक के बंधन के कारण हुआ वहां से बाहर नहीं आती परंतु उस इलाके में वह भी व्यक्ति रात में जाता है तो उसके साथ वह यही व्यवहार करती है और उसे मार डालती है आज भी उस भूतनी के इलाके में कोई भी व्यक्ति नहीं जाता है।

भूतों की कहानी नंबर 4"ईमानदार भूत की कहानी".


आज से करीब 500 वर्ष पहले जब भारत में मुगलों का शासन था उसी समय एक हिंदू शासक हुआ करते थे जिनका नाम श्री रघुवेंद्र सैनी जी हुआ था वह अपने इलाका को मुगलों के अधीन होने से बचाना चाहते थे और अपने लोगों के साथ-साथ अपने संस्कृति एवं अपने संपत्तियों को भी बचाना चाहते थे।

परंतु मुग़ल उस समय बहुत ही ताकतवर थे और उनका मुकाबला करना बहुत ही मुश्किल हुआ करता था परंतु उन्होंने मुगलों के आगे अपना सर झुकाने से बिल्कुल इंकार कर दिया और उन्होंने कहा कि हम मुगलों से लोहा लेंगे और चाहे जो हो जाए हमारे जीते जी मुगल हमारे इधर भी इस माटी को अपना नहीं बना सकते और हम अपना सर कटा लेंगे परंतु उनके सामने सर नहीं चुकाएंगे और अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए कुछ भी करेंगे।

उस समय मुगलों की बहुत बड़ी सेना हुआ करती थी और इनके सेना में मुश्किल से 10000 सैनिक ही थे और मुगलों की सेना इनकी सेनाओं से 50 गुना से भी अधिक बलशाली हुआ करती थी परंतु उन्होंने अपने हौसले के बदौलत मुगलों को टक्कर देने की पूरी धार ली थी मुगलों ने इनकी रियासत को लूटने का पूरे कोशिश करना चाहते थे वह लोग चाहते थे कि या तो वे उनके शरण में आ जाए और उनकी कहे गए मुताबिक पर चलें और मुगल अपना शासन कायम कर सकें परंतु वह बिल्कुल भी मानने को तैयार न थे।

राघवेंद्र सैनी के सबसे प्रमुख व्यक्ति थे श्री रामानंद स्वामी वह बहुत ही बलशाली थे और उनकी बुद्धि का तो कोई जोड़ ही नहीं था उन्होंने देखा कि अगर हम खुलेआम रूप से मुगलों से युद्ध लड़ते हैं तो अवश्य ही हम उसी युद्ध में हार जाएंगे क्योंकि मुगलों की सैन्य बल उनके सैन्य बल से 50 गुना अधिक था तभी उन्होंने सोचा कि क्यों ना हम कूटनीति से मुगलों को हराए और अपनी सल्तनत को कायम रखें एवं मुगलों के सामने बिना सर झुकाए सर उठा कर चले।

तभी उन्होंने तरकीब लगाया और उन्होंने अपने राजा राघवेंद्र सैनी के साथ एक गुप्त योजना बनाई और उस योजना के तहत उन्होंने सबसे पहले मुगल शासक को एक पैगाम भेजा है कि अगर वह उस रियासत के खजाने को लूट लेंगे तो वह उस सल्तनत के मालिक हो जाएंगे और रामानंद स्वामी ने अपनी खजाना को एक साथ एकत्रित करके और अपनी सारी सैन्य बल को वहां पर टिका लिया क्योंकि उन्हें पता था कि मुगल सल्तनत के हुकुम इस शर्त को मान जाएंगे और वह अवस्थी चाहेंगे कि वे उनके खजाने को लूट लेंगे और साथ में सल्तनत को पर भी कायम कर लेंगे।

स्वामी रामानंद की योजना यही थी कि वह किसी प्रकार मुगल के द्वारा भेजे गए सारे सेना को नष्ट करके अपने खजाना को बचा लेंगे और बदले में वह मुगल सल्तनत से उस हार के चलते अपनी सियासत को बरकरार रखने के लिए कहेंगे और उन्हें कहेंगे कि हम अपने सल्तनत में हमेशा के लिए राज करेंगे आप हमारे सल्तनत में कभी भी घुसपैठ नहीं कर सकते और शर्त भी यही लग चुके थे मुगल अपने शर्त के बिल्कुल भी नईम करने वाले व्यक्ति थे तभी उन्होंने अपनी एक बड़ी सी टोकरी को राजाराघवेंद्र सैनिक के खजाने की ओर बढ़ा दिया वहां पर राघवेंद्र सैनिक के सारे सैनिक तैनात थे पूरे चौक अन्य थे।

तभी मुगल्स के सैनिक वहां पहुंच गए वहां पर राजा राघवेंद्र सैनी की सैनिकों के सामने मुगलों की 4 गुनी सेना और वह भी पूरी तैयारी के साथ युद्ध के लिए तैयार हो गए संख्या में अधिक होने के कारण मुगल राजा राघवेंद्र सैनी के सेना पर भारी पड़ने लगे धीरे-धीरे राजा की सैनिक घटने लगी अब उनकी खजाना खतरे में पड़ चुकी थी तभी राजा राघवेंद्र सैनी ने सोचा कि क्यों न वो खुद पहले ही मोर्चा संभाले और उन्होंने मोर्चा संभालने के लिए मुगलों की सेना से लोहा लेने लगे।

बहुत ही भीषण युद्ध होने लगा राजा राघवेंद्र सैनी बहुत ही वीरता से मुगल के सेना सैनिकों से लड़ने लगे परंतु वह जनसंख्या में इतनी अधिक के की उन्हें प्राप्त करना बहुत ही मुश्किल था और राजा राघवेंद्र उन से लड़ते रहे और लड़ते-लड़ते वह पूरी तरह थक चुके थे फिर भी वह हार नहीं माने मुगलों ने उन पर लगातार प्रहार पर प्रहार करते गया उसके बाद राजा राघवेंद्र सैनिक पूरी तरह से घायल हो चुके थे उनकी एक हाथ भी कट गई थी परंतु वह फिर भी हार नहीं माने इस प्रकार उनके शरीर के कई हिस्से कट गए फिर भी वह लड़ते रहें इस प्रकार धीरे-धीरे उनकी शक्ति खत्म होते गए और वह मृत्यु को प्राप्त हो गए।

परंतु चमत्कार तब हो गया जब उनकी मृत्यु के पश्चात सारी राघवेंद्र सैनी की सेनाओं की मनोबल घट गई और वे सभी मृत्यु को प्राप्त हो गए जैसे ही मुगल सेना ने अपनी जीत की खुशी मनाया और जैसे ही उन्होंने उनकी खजाना को हाथ डाला अचानक से वहां पर कुछ ऐसी घटना घट गई जिसे देखकर पूरी मुगल सल्तनत हिल गई वहां पर हुआ यही था कि जो भी व्यक्ति उनके खजानो को छूने तक की कोशिश करता है अचानक से उसकी गर्दन कट जाती थी।

ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि राजा राघवेंद्र सैनिक मरते वक्त तक युद्ध में अपने खजाना की रक्षा करना चाहते थे और जिसकी वजह से उन्हें मलावरा हो गया था कि वह उस खजाने की रक्षा नहीं कर सके और उनकी आत्मा को शांति नहीं मिल रही थी और उनकी आत्मा ने उसी समय पर ले लिया था कि वह मरणोपरांत भी खजाना की रक्षा करेंगे और यही वह मरने के बावजूद भी उनकी आत्मा जीवित है और जो भी व्यक्ति उनके उस खजाने को छूता है वह उसे मृत्यु के घाट उतार देते हैं

यह सब चीजें देखकर मुगल ने उनकी राज्य पर अतिक्रमण करने का अपना सपना छोड़ दिया और वे उनके राज्य को पूरी इज्जत समीप उनके सबसे प्रमुख व्यक्ति स्वामी रामानंद को उनका राज्य सौंप दिया और आज भी उनके उस खजाने को स्वयं राजा राघवेंद्र सैनी रक्षा करते हैं।

उन्होंने मरने के उपरांत भी अपने राजा की पूरी इमानदारी पूर्वक से हिफाजत की है इसलिए हमने उन्हें एक ईमानदार भूत कहा है अगर आप उनके खजाने को देखते हैं तो वह आपको कुछ नहीं करेंगे जब तक कि आप उन्हें उनके खजाने को हाथ नहीं लगाते इसलिए हमने उन्हें एक ईमानदार भूत की उपाधि दी है।


भूतों की कहानियां नंबर 5"खंडार में भूत है"



बहुत समय पहले की बात है एक श्यामपुर नाम के गांव था जहां पर एक बहुत ही सुखी संपन्न परिवार रहा करते थे उस परिवार में कुल 5 व्यक्ति थे जिनमें से उस परिवार के मुखिया श्री गोविंद लाल जीत है और उनकी पत्नी श्रीमती रामावती देवी थी और उनके दो पुत्र थे और एक पुत्र का विवाह हो चुका था वह लोग बहुत ही सुखी एवं संपन्नता से अपने घर में रहा करते थे।

तभी अचानक उनके घर में एक बहुत ही बड़ी घटना घटित हो गई वहां के एक साहूकार ने बेईमानी से उनके घर को हड़प लिया घर के हर अपने के बाद उनके जीवन में बहुत ही संकट का काल बीत रहा था क्योंकि उन्हें रहने के लिए छत नहीं थे।

बहुत ही मुश्किलों का सामना कर रही थी वह परिवार और उस परिवार ने उस साहूकार के खिलाफ बहुत ही कंप्लेन पुलिस में किया परंतु साहूकार बहुत ही पैसे वाला था और उसने पुलिस को ही खरीद रखा था पुलिस उसकी कोई बात नहीं मान रही थी जिसके चलते वे लोग पूरे परेशान थे उन लोगों ने गांव के लोगों से भी बहुत ही मदद मांगी परंतु गांव की किसी लोग ने उनकी मदद नहीं की।

अपनी परेशानी से तंग आकर उन पांचों व्यक्तियों ने चुपके से उस घर में जाकर आत्महत्या कर ली दर्दनाक मृत्यु होने के कारण उनकी आत्मा को शांति नहीं मिल सकी और वे पांचों आत्मा आज भी उस खंडहर अर्थात अपने ही घर में भूत की तरह रहते हैं भूत की तरह ही नहीं भूत बनकर रहते हैं।

और जो भी व्यक्ति उस खंडहर था तो उनके घर में जाता है उसे मार डालता है उस साहूकार को भी उसी घर में उन्होंने मार डाला था।अब उस गांव में पूरा खौफ है और यहां तक कि एक पक्षी भी उस गांव में के उस खंडार में नहीं दिखते।

और उस खंडार को अब कोई भी नहीं नुकसान पहुंचाना चाहता है और यहां तक की उस खंडहर को कोई भी लोग इसके भीतर जाने से डरते हैं और कोई भी जाते भी नहीं है आज भी वह खंडहर उनसे ही वीराना है सच है या हकीकत पता नहीं पर लोगों का आज भी आ मानना है कि उस खंडहर में आदमी भूत रहते हैं।

निष्कर्ष-:

दोस्तों आज के इस लेख में आपने जाना है अभी तक-
•भूतों की कहानियां हिंदी में।
•भूतों की कहानियां, मजेदार-डरावने भूत की कहानी।
•भूतों की कहानी नंबर 1.
"भूखी प्यासी खून पीने वाली भूतनी"
•भूत की कहानी नंबर 2.
"गुस्सैल भूत की कहानी"
•भूतों की कहानी नंबर 3
"शादी करने वाली भूतनी की कहानी"
•भूतों की कहानी नंबर 4
"ईमानदार भूत की कहानी".
•भूतों की कहानियां नंबर 5
"खंडार में भूत है"

मुझे पूरा आशा है कि आप को हमारे भूतों की कहानियां बहुत ही पसंद आई होगी और आपको पढ़ने में बहुत मजा आया होगा आप हमारे इस भूतों की कहानियां को अपने दोस्तों के साथ अवश्य ही एक शेयर करें।

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