Maharana partap in hindi

Maharana partap in hindi -महाराणा प्रताप की जीवनी।
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Maharana partap in hindi


महाराणा प्रताप कौन थे?महाराण प्रताप ने क्या किया था?Maharan prtap को  इतिहास के पंनो में एक महान व्यक्ति क्यो लिखा गया है?इत्यादि बाते आपके मन में चल रहा होग माहराणा प्रताप के बारे आज मैं आपको बताऊगा भारत के वीर maharana pratap के बारे में और मैं आपको बता दु महाराणा प्रताप वो थे जिन्होंने पूरे भारत पर राज करने वाले अकवर के विशाल सेना जिसमे की 80 हजार से भी अधिक सैनिक थे,उसे अपने मुठी भर सेना के साथ युद्ध के मैदान में भागने को मजबूर कर दिया था,मैं आपको बता दु अकवर  भी महाराण प्रताप से डरते थे।आइये जानते है महाराणा प्रताप के बारे में पूरी कहानी।


महाराणा प्रताप कौन थे?



महाराणा प्रताप मेवाड़ के राजा उदय सिंह और महारानी जयंती बाई के पुत्र थे,उनका जन्म 9 मई 1540 में कुण्डलगड नमक गांव में हूआ था।


महारणा प्रताप का जन्म- 9 मई 1540 में कुण्डलगड में।

महाराण प्रताप का पूरा नाम- महाराण परताप सिंह सिसोदिया।
महाराणा प्रताप किस धर्म के थे- सनातन धर्म 


महाराणा प्रताप के माता का नाम- महारानी जयवंती बाई


महाराणा प्रताप के पिता का नाम- उदय सिंह


महाराण प्रताप के संतान के नाम- अमर सिंह,भगवान दास आदि।


महाराण परताप का मृत्यु- 19 जनवरी 1597 (56 वर्ष) की आयु में।


महाराणा प्रताप का बचपन:


  • महाराण प्रताप बचपन से ही बहुत बहादुर थे,उनमे लीडरशीप (नेतृत्व)की क्षमता बचपन से ही थी,वे खेल-खेल में बच्चों के लीडर बन जाते थे,और वो जो कहते थे ,वही बच्चे मानते थे।महाराणा प्रताप के माता उनके पहले गुरु भी थी जिन्होंने महाराण प्रताप को अस्त्र-सस्त्र की विद्या बचपन से भी देना शुरू कर दिया थे।



  • महाराणा प्रताप बचपन मे ही अपनी पूरी सेना की शिक्षा पूरी कर ली थी,महारणा प्रताप शारीरक रूप से पूरे तंदुरुस्त थे।



  • महाराण प्रताप के घर मे इर भी उनके भाई थे,जिनमे से बपारावत,राणा सांगा,राणा हमीर ,राणा प्रताप आदि मगर सबसे बहादुर और क्रामथ थे महाराणा प्रताप।


महाराणा प्रताप का शारिक बनावट,पोषक, रहन सहन।



शारीरिक बनावट-महाराण प्रताप का hight 7•5 फिट था,वे शारीरिक रूप से पूरे मजबूत थे,उनका बाहुबल बहुत अद्धिक था वो अकेले ही 10 लोगो के बराबर थे ,बचपन से ही अस्त्र-सस्त्र की शिक्षा ले लेने के कारण वे युद्ध नीति में पूरी तरह से परिपाक थे,वे ओर सभी राजा की तरह वासना के पीछे नही भागते थे,वे हमेशा अपने शरीर को मजबूत बनाने की कोशिश किया करते थे और अपने प्रजा को भी इसके बारे में  बताते थे।
   आप महाराण प्रताप की ताकत को इसी से अंदाज लगा सकते है,जब हल्दी घाटी का युद्ध चल रहा था तब अकवर के सबसे श्रेस्ट सेनापति का महाराणा प्रताप से आमने सामने भिरंत हुआ तब महाराणा प्रताप ने अपने तलवार के एक ही वार में बहलोल खान को घोड़ा समेत दो टुकड़ा कर दिए।
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महाराणा प्रताप ।


पोषाक- हमने आपको बताया था की,महाराणा प्रताप शारीरिक रूप से पूरी तरह तंदुरुस्त थे,और उनका पोषक भी एसा ही था,वे 70 kg के कवच पहनते थे,10 kg.के जूते ,20 kg के तलवार हाथो में और युद्ध के समय वो 80 kg के भला रखते थे उनके बाहुबल बहुत ही मजबूत था।


महाराणा प्रताप का जीवन -:



  • महाराण प्रताप का बचपन तो महलो में गुजरा लेकिन ,उसी समय मुगल शासक अकवर भारत मे अपने पाओ जमा रहा था जिसका असर मेवाड़ राज्य पर भी पर रह जिसके चलते कुछ ही समय के बाद अकवर ने कूटनीतिक तरीके से महाराणा प्रताप के घर मे आपस मे लड़ने के लिए महाराण प्रताप को भइयो को लालच दे कर अपने मे मिला लिया और मेवाड़ को अपनाने की कोशिश किया तब महाराण प्रताप ने अकवर को रोका था मगर उनके राज्य तहस नहस हो गए था।



  • उसके कुछ समय बाद महाराण प्रताप अपने राज्य के भील (आदिवशियो)की मदद ली और उन्हें सेना की शिक्षा दी और एक सेना के साथ मेवाड़ में चट्टानों की भांति अकवर के सामने खड़े हो गए।



  • जब वो भीलो कि अपना सेना बनाया तब से वो उन्ही भीलो के साथ रहने लगे,उन्ही के साथ कच खाना खते थे,बिना बिस्तर के सोते थे,जिससे वो भीलो के साथ पूरी तरह से घुल मिल गए थे,ओर भील भी उनके एक आज्ञा मात्र पर मारने के लिए तैयार थे।जिससे उन्हें अपने देश पर मार मिटने वाले सेना मिल गए थे।



  • महाराण प्रताप अपने जीवन में कभी हार नही माना,हमेशा अपने राज्य को सर्व पारी मानते रहे,अपने राज्य के लिए अपना जीवन का भी चिंता न करते थे।


मेवाड़ को अकवर हमेशा से ही अपने अधीन में लेना चाहता था,क्युकी मेवाड़ ही वो राज्य था जहाँ से पस्चिम से आने वाले वस्तुओ का transport system जुड़ा था,अगर को उसे अपने अधीन में लेलेता तो वो वैपर में अकवर अच्छा खासा मुनाफा बढ़ जाता मगर मेवाड़ में महारणा प्रताप चट्टानों की भांति खरे थे ,अकवर ने मेवाड़ को पाने के लिए बहुत सारे उड़ भी किये मगर वो सफल न हो सका उन्ही ऊधो में खास था हल्दी घाटी का युद्ध।


हम आपको बता दे कि अकवर भी एक  महान राजा था ,जो कि और राजाओ की तरह पीठ के पीछे वॉर करके किसी भी देश (राज्य)को  अपने मे शामिल नही करता था।वो खुले मैदान लड़के युद्ध मे हरा कर ही किस भी जगज पर राज करता था।


हल्दी घाटी का युद्ध।


  • इतिहास के पंनो में हल्दी घाटी का युद्ध बारे बारे अक्षर में लिखा जिसमे पूरे भारत पर राज करने वाला अकवर के 80 हजार की सेना महारणा प्रताप के 15 हजार से भरी थी मगर अकवर की 80 हजार के सेना पर महारणा प्रताप की 15 हजार की भीलो की सेना भारी पड़ी थी,तभी महाराणा प्रताप ने कहा था हैम अपनी मात्र भूमि के रक्षा में हमरा एक एक सेना उनके 5 सेना पर भारी पड़ेंगे।इतिहास के पंनो में ये भी लिखा ही है कि "अकवर की सेना में दम था….अकवर की सेना में दम था,मगर महाराणा प्रताप के सीने में अकवर की सेना से ज्यादा दम था"।
  • दोस्तो हम आपको बता दे कि महाराण प्रताप हल्दी घाटी के युद्ध मे इसलिए भी भारी पर रहे थे क्युकी उन्हें उस घाटी की पूरी जानकारी थी क्युकी उनका बचपन से ही वही रहे है,और भील भी पहरों में यमराज की तरह ही अकवर की सेना पर टूट पड़ते थे।
  • उस युद्ध मे अकवर की मजबूत सेना भी महाराण प्रताप के सेना के सामने छोटा पर गई और उन्हें मैदान छोड़ के भागना पड़ा था।


जब अकवर  महाराण प्रताप को हरा न सके तब उन्होंने सन्धि संदेश महाराण प्रताप के पास भेजा मगर महाराण प्रताप तो महाराण उन्होंने उनके सारी सन्धि संदेश को खारिज कर दिया।


एक बार तो अकवर ने महाराणा प्रताप को उनके छोटे से मेवाड़ राज्य के बदले आधी भारत देने का parposal दिया मगर महाराणा प्रताप ने उसे भी खारिज कर दिया ,वो आधी भारत के बदले भी अपना छोटा सा राज्य को देने के लिए तैयार न हुए।


एक बात जिसे जान कर आप शायद हैरान हो जाएंगे कि पूरे भारत पर अपना अधिकार जमने वाला मुगल शासक अकवर महाराणा प्रताप से इतना डरता था कि वो अपने महल में महाराणा प्रताप का नाम भी नाही सुनना चाहता था,और तभी उसने महाराणा प्रताप के डर के कारण अपना महल बदल लिया और वो आगरा की जगह लाहौर में रहने लगे क्युकी वो जान गया था कि वो मेवाड़ में महाराणा प्रताप को हरा नही सकता,फिर अकवर ने मेवाड़ को हासिल करने का सपना छोर दिया और बंगाल की तरफ अपना साम्राज्य बढ़ाने लगा।
        आप ये भी जान ले कि अकवर कभी भी महाराणा प्रताप के सामने युद्ध मे नही गए क्युकी अकवर जनता था कि महाराणा प्रताप बहुत ही लम्बे और मजबूत थे मगर अकवर hight में छोटा था अगर वो महाराणा प्रताप से भिड़ेगा तो महाराणा के तलवार की एक वार ही अकवर को मृतु के घाट उतारने के लिए काफी था ,जैसा कि अकवर की सबसे उत्तम सेनापति  के साथ हुआ था।


बात अगर महाराणा प्रताप की हो रही है,तो उनके घोड़े चेतक और उनके हाथी राम प्रसाद का जिक्र होना बहुत जरूरी हैं।


महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक-महाराण प्रताप ने अपने घोड़ा चेतक को बारे ही प्यार से पाला था ,और चेतक भी अपने सवामी की तरह ही मजबूत था,युद्ध के समय चेतक की सर में हाथियों का मुकुट पहना दिया करते थे जिससे हाथी भी चकरा जाते थे कि ये घोड़ा है या हाथी । चेतक का रफ्तार ही उसका पहचान है।
        सबसे प्रमुख बात जब युद्ध मे महाराणा प्रताप के घोड़ा का एक पैर का भाग काट गया था,मगर चेतक ने अपने सवामी को रक्षा के लिए कटे हुए पैरों के साथ युद्ध के मैदान में लड़ा और अपने सवामी के रक्षा के लिए 18 fit की खाई को पर करके अपने मालिक को सुरक्षित जगह पर पहुचा दिया जिसमें महाराणा प्रताप के घोड़ा चेतक की मौत हो गई मगर वो इतिहास के पंनो में अमर हो गया।


महाराणा प्रताप के हाथी राम प्रसाद-जिस प्रकार  महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक था उसी प्रकार उनका हाथी राम प्रसाद भी स्वमी भक्त था,जिसने अकेले अकवर के 8 हाथियों को मार डाला था ,तभी अकबर के सेनापति ने रामप्रसाद को साथ ले जाने का सोचा और 15 हाथियों का घेरा बना कर रामप्रसाद को घेरा लिया और उसे बंधक बना कर ले गये वहाँ अकवर ने रामप्रसाद का नाम बदल कर पीर रखा और उसे अपने कारागार में बंद कर दिया,ओर अकवर ने पीर हाथी को अपने सेना सामील करने के लिए पीर को अच्छी-अच्छी भोजन दिया मगर वो तो ठहरा स्वमी भगत उसने अपने स्वमी के बिछड़ने के गम में खाना पीना छोर दिया जिसके चलते रामप्रसाद की 22 वे दिन कमजोरी के कारण मौत हो गई।
     तभी अकवर ने सोचा कि वो जिस इंसान के एक हाथी को झुका न सका वो उस इंसान को कैसे झुक सकता है तभी उसने अपना मन बदल लिया और मेवाड़ को अपना बनाने का सपना छोर दिया।


एक बार की बात है जब अब्राहम लिंकन भारत आ रहे थे तभी उन्होंने अपने माँ से पूछा कि आपको भारत से कुछ मंगवाना है तब उनकी माँ ने उनसे कहा कि बेटा तुम हल्दी घाटी का मट्टी मेरे लिए लाना क्युकी मैं उस मिट्टी को पूजा करना चाहती हूँ क्युकी उस मिट्टी ने पुजनीय महाराणा प्रताप को जन्म दिया है जिन्होंने आधी भारत के बदले भी अपने छोटे से राज्य को देने से इनकार कर दिया था।


जब अकवर ने महाराणा प्रताप के मे मेवाड़ पर आक्रमण करने छोर दिया वाड़ पर आक्रमण करने छोर दिया तब महारणा प्रताप ने अपने पूरे राज्य को अपने अधीन में ले लिया और वहाँ के उन्न्ति में ध्यान देना सुरु कर दिया।


महाराणा प्रताप की मृत्यु-



19 जनवरी 1597 में जब महाराणा प्रताप शिकार कर रहे थे तभी एक शेर ने उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया था,जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई।


जब महाराणा प्रताप की मृत्यु की खबर जब पूरे भारत मे फैला ,तभी इस बात की जानकारी अकवर को मिली तो वो भी बहुत दुखी हुवा।


हमने आपको पहले ही कहा था कि अकवर एक महान राजा था,जो कि अपने सत्रुओ की वीरता को भी सलाम करता था,तो हम आपको बता रहे थे कि जब महाराणा प्रताप की मौत की खबर अकवर को मिली तो उन्होंने महाराणा प्रताप के मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि -आज धरती ने अपने एक वीर पुत्र को खो गई,और महाराणा प्रताप की मृत्यु ने मुझे अपने जीवन मे एक खेद दे गया कि मैं महाराणा प्रताप को कभी हरा न सका।


आज इतिहास के पंनो पर यह बारे-बारे अक्षरों में लिखा गया कि -महाराणा कभी हरे नहीं और अकवर कभी जीत नही।


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