भारत से कितने देश अलग हुए जानिए उनके नाम।

Bharat से कितने देश अलग हुए जानिए उनके नाम और कारण ।
https://Bajrangisoch.com
भारत के अलग होने वाले देशों के नाम और तिथि।





भारत एक ऐसा देश है ,जिसकी इतिहास की कथाओं  की अगर हम व्याख्या करें तो सालो लग जीएंगे ,लेकिन आज हम आपको भारत के बारे में का ऐसे ही इतिहास को बताएंगे ।
       आज हमारा topic भारत से कितने देश अलग हुए ,जिसमे हम आपको उन देशों के बारे में बताएंगे जो कि कभी अखंड भारत का अंग हुआ करता था,जिसमे से हम पाकिस्तान ,नेपाल ,बांग्लादेश को ही जानते है।मगर बहुत सारी ऐसे देश है जो कि कभी भारत का अंग हुए करता था।
You can find all india Latest jobs click here


आज से 2500 साल पहले  भारत का क्षेत्रफल 83 लाख sq ,km था,जो कि अब 33 लाख sq, km में सिमट गया तो आइये हम जानेंगे कि वो कौन-कौन सा देश है ,जो कभी भारत का हिस्सा थे।

No 1.Iran 

जी है दोस्तो ईरान कभी हमारे अखंड भारत के हिस्सा थी ,जी अरबो ने हमला करके भारतीय शासको को हर कर एक नया देश का निर्माण किया जिसका नाम ईरान पारा।

No 2.Kambodia

पहली सतब्दी में kambodiya भारत का ही हिसा था ,जिसे एक kambodia नामक भारतीय ब्राह्मण ने एक अलग हिन्दू राष्ट्र का निर्माण किया जो कि आगे चल कर एक नया देश बना,जिसका नाम kambodia पारा।

No 3.wiatnam (वियतनाम)

वियतनाम देश का नाम पहले चम्पा प्रदेश था,जो अखंड भारत का एक प्रमुख हिसा था,जहा मुस्लिम शासकों ने धीरे-धीरे कब्जा जमाते  गए और 1825 में एक नया देश का निर्माण किया,जिसका नाम पड़ा वियतनाम।

No 4.Maleysia (मलेसिया)

मलेशिया पहले भारत का ही हिस्सा था,झा बौद्ध धर्म के मानने वाले लोगों की जनसँख्या अधिक थी ,फिर आजादी के बाद ये एक अलग देश बन गया,सन 1948 में यह देश बना।

No 5.Indinesiya (इंडोनेशिया)

आज इंडोनेशिया दुनिया का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है,लेकिन पहले ये अखंड भारत का ही हिस्सा था,जिसकी अवशेष के तौर पर वह बहुत कुछ है,ओर साथ मे वहां भारतीय संस्कृति आज भी जिंदा है।

No 6.FLIPINAS (फलिपियन्स)

Flipinas देश पहले भारत का हिस्सा जिसे कज से करीब 300 साल पहले यमन के मुस्लिम शासको ने आपने कब्जे ले लिया और एक नया देश का निर्माण किया जिसका नाम पड़ा flipinas पारा।

No 7.Afaganistan (अफगानिस्तान)

अफगानिस्तान पहले भारत का ही हिसा था,जिसके राजा हिन्दू थे जिसके नाम अम्बी था,जी की सिकंदर से संधि करके आपने इस प्रदेश को सौप दिया,और बाद में ये अफगानिस्तान के नाम से जाना-जाने लगा,और भी मुस्लिम शासको ने यहां के सांस्कृति को धीरे-धीरे नस्ट कर दिया।

No 8.Nepal

ये देश कभी भारत का ही हिस्सा था,जिसे गोरखा ने अलग करके एक नया हिंदू राष्ट्र का निर्माण किया,जिसका नाम नेपाल परा।गोरख कोई और नही भगवान बौद्ध का ही वंसज है।

No 9.Bhutan (भूटान)

भूटान एक छोटा सा देश है,जो कि 1949 से पहले भारत का ही हिस्सा था,जो कि आजादी के बाद एक नया देश बन गया,जिसका नाम भूटान परा।

No 10.Shri lanka (श्री लंका)

श्री लंका का प्राचीन नाम कंकपनी था,जिसपे ब्रिटिश ने अपना शासन को कायम करने में सफल हो गए और1937 में इसे एक नया देश बनाया जिसका नाम श्री लंका रखा गया।

No 11.Manmar (म्यांमार)

म्यांमार  पहले भारत का ही हिस्सा था,जिसे हैम वर्मा प्रदेश के नाम से जाना जाता था,जहा के पहला राजा वाराणसी के थे,फिर वहां 1852 में कुछ ब्रिटिश बिज़नेस करने के माध्यम से पहुँचे ओर फिर वहां अपना कब्जा जमा दिया और 1937 में एक नया देश का निर्माण किया जिसका नाम म्यांमार परा।

No 12.Thailand (थाईलैंड)

पहले इसका नाम श्याम प्रदेश था,और पहले यहाँ हिंदुओ का शासन था टैब ये भारत का ही हिस्सा था,फिर यह बौद्ध धर्म का प्रचार तेजी से ही ने लगा और फिर यह हिन्दुओ की संख्या कम हो गई और ये एक नया देश बन गया,जिसका नाम परा थाईलैंड।

No 13.Tibbat (तिब्बत)

तिब्बत का प्राचीन नाम त्रिवासन्त था,जो कि कभी भारत का बहुत ही बार हिस्सा था,जिसे चीन ने भारतीय शासको को हर कर आपने में मिला लिया,फिर ये चीन से आजाद हो कर एक नया देश बन गया जिसका नाम पड़ा तिब्बत फिर कुछ समय बाद इसे चीन ने आपने कब्जे में ले लिया।

No 14.Pakistan(पाकिस्तान)

जी दोस्तो पाकिस्तान के बारे हम क्या कहे ,ये तो अभी सारि दुनिया ही जानती है,तो इसके बारे में हम लिखना जरूरी नही समझतें।

No 15.Bangladesh (बांग्लादेश)

बांग्लादेश पहले भारत का हिस्सा था,जो कि पाकिस्तान में चला गया फिर पाकिस्तनि हुकूमत ने अपना वर्चस्व बनने के लिए वह के लोगों पर अत्याचार करने लगे,फिर हिन्दुस्तान के वीरो ने अपनी जान की बाजी लगा कर एक आजाद देश का निर्माण किया जिसका नाम बांग्लादेश परा।


तो दोस्तो हम आशा करते है कि आपको हमारा आर्टिकल आपको जरूर पसंद आएगा ,अगर आपको हमरा आर्टिकल पसंद आये तो आप हमें कॉमेंट करके जरूर बताएं।




Post a Comment

0 Comments